सरकार को 100 शैक्षणिक संस्थानो से विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय दर्जा के लिए आवेदन मिले

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नयी दिल्ली: 13 दिसंबर 2017 केंद्र सरकार ने 10 सार्वजनिक और निजी संस्थानो को विश्व स्तर पर श्रेष्ठ 100 संस्थानो की श्रेणी में सम्मिलित करने के लिए नियामक ढांचे को अनुमति प्रदान की है। इनमें नए स्थापित संस्थान और वर्तमान संस्थानो का उच्चीकरण सम्मिलित है और इसके अनुरूप 12 दिसंबर,2017 तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए देश भर से कुल सौ आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत दस केंद्रीय विश्वविद्यालय, पच्चीस राज्य विश्वविद्यालय,छह मानद विश्वविद्यालय, बीस राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और छह अन्य संस्थान सम्मिलित हैं। निजी क्षेत्र के अंतर्गत नौ निजी विश्वविद्यालयो और सोलह मानद विश्वविद्यालयो ने ब्राउनफील्ड श्रेणी और आठ संस्थानो ने ग्रीनफील्ड श्रेणी के अंर्तगत आवेदन किया।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने इस संबंध में कहा कि विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय बनने वाले श्रेष्ठ संस्थानो के प्रस्ताव को जबरदस्त समर्थन मिलना देश में उच्च शिक्षा के स्तर सुधारने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना को ओर सशक्त करता है।

श्री जावडेकर ने कहा कि शिक्षा जगत से जुडे सभी लोग इस घटनाक्रम का स्वागत करेंगे। विश्व के कई देशो में इस प्रकार से विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयो का सृजन हुआ है और अब देश में भी ऐसा ही हो रहा है। श्री जावडेकर ने कहा कि श्रेष्ठ संस्थानो के चयन न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि इससे संपूर्ण शिक्षा क्षेत्र प्रतियोगिता के लिए प्रेरित होगा।

इस उद्धेश्य के लिए गठित सशक्त विशेषज्ञ समिति द्वारा चयन चुनौती प्रक्रिया से किया जाएगा। चयनित बीस संस्थानो का नाम “श्रेष्ठ संस्थान” रखा जाएगा और इन्हें विश्व स्तरीय संस्थान बनने के लिए अपनी कार्यप्रणाली चुनने की स्वतंत्रता होगी।इस संस्थानो को कई क्षेत्रो में अधिक स्वायत्ता प्रदान की जाएगी। इसमें कुल प्रवेश दिए गए छात्रो में से 30 प्रतिशत तक विदेशी छात्रो को प्रवेश देना, कुल शैक्षणिक पदो में 25 प्रतिशत तक विदेशी अध्यापक, कुल कार्यक्रमो के 20 प्रतिशत तक आनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान करना, यूजीसी की अनुमति के बिना विश्व स्तर पर श्रेष्ठ पांच सौ संस्थानो के साथ शैक्षणिक गठबंधन करना,बिना किसी बाधा के विदेशी छात्रो से शुल्क निर्धारित करना,क्रेडिट घंटो के संबंध में पाठ्यक्रम के ढांचे को और डिग्री प्राप्त करने के लिए अवधि को लचीला रखना और पाठ्यक्रम आदि निर्धारित करने में पूर्ण स्वतंत्रता सम्मिलित है।

इस योजना से भारतीय छात्रो को देश में ही विश्वस्तरीय शिक्षा और अनुसंधान सुविधा प्राप्त हो सकेगी।

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